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Holi

बधाई हो बधाई 

होली है आई 

आज की लालिमा भी रंगों में छाई 

सुबह आज ऊठी व नहाई 

और माँ - पापा को प्रणाम किया 

बड़ों का आशीर्वाद लिया 

एक - दूजे के घर गई 

मिठाई बाँटी , व रंग लगाया 

तब तक पिचकारी लेकर भी घर आया 

दोस्तों को रंग लगाया 

खिड़की से पानी फेंक मैंने आंटियों को सताया 

बुरा न मानो Holi है ये dialogue मैंने सुनाया 

डांट स्वरूप मैंने उनका आशीर्वाद ही पाया 

उत्साह भरी बेला है आई 

कभी नाची तो कभी गाई 

दोस्तों संग मैंने धूम मचाई 

होली है आई 

बधाई हो बधाई 


- Garima Kanwar (Garima Ki Kavita)

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हज़ार रंग होली के 

Garima Ki Kavita
होली के रंग हज़ार .. 

नहीं विश्वास होता ..!

तो जाकर देख लो in बाज़ार । 

लेकिन भैया 

इनसे कुछ नहीं होने वाला 

जब तक दिल में न हो प्यार के रंग । 

यही तो है जो कर पाएंगे नफरत को भंग ।। 

होलिका दहन के इस अवसर पर । 

हिन्दू मुस्लिम का भेद जाएगा मर ।। 

हज़ार है होली के रंग । 

ये आई उमंग व उत्साह के संग । 

हज़ार है प्यार भरी होली के रंग ।।  

- Garima Kanwar

Garima Ki Kavita

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