24 मार्च 2020 को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने 21 दिनों के लिए देशव्यापी तालाबंदी का आदेश दिया, भारत में COVID-19 महामारी के खिलाफ एक निवारक उपाय के रूप में भारत की संपूर्ण 1.3 बिलियन आबादी के आंदोलन को सीमित कर दिया यह 22 मार्च को 14 घंटे की स्वैच्छिक सार्वजनिक कर्फ्यू के बाद आदेश दिया गया था, इसके बाद देश के COVID-19 प्रभावित क्षेत्रों में नियमों की एक श्रृंखला लागू की गई थी। लॉकडाउन तब रखा गया था जब भारत में पुष्टि किए गए सकारात्मक कोरोनावायरस मामलों की संख्या लगभग 500 थी। पर्यवेक्षकों ने कहा कि लॉकडाउन ने महामारी की विकास दर को 6 अप्रैल तक बढ़ाकर हर छह दिन में दोगुना करने की दर को धीमा कर दिया था, और 18 अप्रैल तक, हर आठ दिनों में दोगुने की दर से बढ़ा दिया था।
ये कविता मैंने जनता कर्फ्यू के दिन ही लिखी थी ।
उम्मीद करती हूँ आपको ये कविता पसंद आएगी ।
हारेगा हारेगा हारेगा हारेगा कोरोना ।
बस आप घर पर रहो न ।।
मै करती आप से सिफारिश हूँ ।
करती आप सब से गुजारिश हूँ ।।
ओ इंसान यूँ ना पूछ की क्या है हाल ।
क्योँ की जनता कर्फ्यू है फिलहाल ।।
उद्देश्य है कोरोना को करना खस्ताहाल ।
इससे न होने देंगे देश का बांका बाल ।।
ओ साडा क्या तूसी हो मेरे नाल ।।।
अगर हाँ .......
तो हम देशवासी बनेंगे इस देश की ढाल ।
फिर वो जाल हो या हो कोरोना का काल ।।
ओ देश ! हम खड़े है तेरे नाल ।
कोरोना ने बिछाया है मृत्यु का जाल ।।
ओ इंसान ! अपवाहें तू social media पर ना डाल ।
क्योँ की इस वायरस को फैलने से रोकना है फिलहाल ।।
इस महामारी से डरना नहीं इसे डराना है ।
वायरस के सामने झुकना ने इसे झुकाना है ।।
कोरोना से भागना नहीं इसे भगाना है ।
छोटों तो समझाना है , बड़ों से बतियाना है ।।
पर घर से बाहर नहीं जाना है ।।।
क्या तुम सब मेरे साथ हो ।
तो ना मिलाओ किसी और से हाथ ओ ।।
करो सबसे नमस्ते !
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तभी तुम कहलाओगे इस देश के फ़रिश्ते ।।।
# मुझे भी सुनो ना ....!
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