Hindustan Kavita
मै हिंदुस्तान हूँ ।
प्रसिद्ध For अपनी शान हूँ ।।
विश्व भर में एकता की पहचान हूँ ।
लेकिन आज अपने आप से अनजान हूँ ।।
न जाने मे कहाँ सो गया ?
न जाने मे कहाँ खो गया ??
मेरी सड़कों पर सन्नाटा है ।
बाजारों मे नहीं बिक रहा आटा है ।।
आज मेरी दुनिया सुनसान है ।
जो कभी करती थी मेरा बखान है ।।
जहाँ कभी अनगिनत गाड़ियां घूमा करती थी ।
जहाँ दुनिया धरती माँ को चूमा करती थी ।।
आज वहाँ सब कुछ बेजान है ।।।
पर ..........
मै तो वही हिंदुस्तान हूँ ।
जो विदेशों मे Secularism की सुर्खियाँ गाया करता था ।
दिल्ली , कोलकता , मुंबई व चेन्नई की वजह से विदेशों मे छाया करता था ।।
पर अफसोस .....
आज मै खुद न पहचानूँ की मैं कौन हूँ ?
न जाने मैं क्यों मौन हूँ ??
क्योँ की ...
इससे पहले तो कभी इतना शांत हुआ ही नहीं !
इससे पहले कभी मैंने ऐसे सुनसान से मौन को छुआ ही नहीं !!
मेरी असलियत क्या थी .......? और क्या हो गई ......??
क्या मैं सुन रहा हूँ वो सच है ....?
की....
आजकल एक वायरस आया है ।
जो मेरी दुनिया पर प्रकोप के रूप मे छाया है ।।
वही मेरे मौन का कारण है ।
उससे जीतना मेरी पहचान का निवारण है ।।
अगर ऐसा ही है .....
तो इस प्रकोप को न मैं फैलने दूंगा ।
मैं इससे लड़ूँगा और जीतूँगा ।।
मैं जीतूँगा ।
मैं ही जीतूँगा ।।
- गरिमा कंवर
( #मेरी पहचान #हिंदुस्तान )
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