कोरोना अपने शत्रु का न धर्म देखता है न देश ,
कोरोना अपने शत्रु की भाषा देखता है न भेष ,
हे मानव !
फिर धर्म के नाम पर क्योँ जागा तेरा ये आवेश ।
क्योँ तू मानवता मे मचा रहा है कलेष ।।
कोरोना न हिन्दू देखता है न मुसलमान ।
कोरोना का दुश्मन है तो सिर्फ इंसान ।।
अगर इंसान नहीं आएगा अपनी हरकतों से बाज ।
तो नहीं हो पाएगा कोरोना का इलाज ।।
हे मानव !
क्या ऐसे होगा कोरोना का इलाज ?
क्या ऐसे आएंगे हम कोरोना से बाज ??
फिर कैसे कर पाएंगे हम मानवतावाद पर नाज़ !?
क्या आप चाहते है ....की हमेशा हिंदुस्तान ऐसा ही हो जैसा है आज !?
क्या ऐसे जीत जाएंगे हम जंग ?
ऐसे हम मजहब ही नहीं मानवतावाद को भी कर रहे है भंग ।
कोरोना से लड़ना है तो मजहब मत देखिए ।
क्यों की मजहब नहीं सिखाता मानवता से बैर रखना ।।
फिलहाल मानवता की खैर करना ।
मानवतावाद की care करना ।।
-Garima Kanwar
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