कभी सोचा भी नहीं था ...
कभी सोचा नहीं था ऐसे भी दिन आएंगे
छुट्टियाँ तो होगी पर मना नहीं पाएंगे
आइस - क्रीम का मौसम तो होगा पर खा नहीं पाएंगे
झूले बुला रहे होंगे पर पास जा नहीं पाएंगे
खाली होने पर भी झूल नहीं पाएंगे
अकेले का साथ दे नहीं पाएंगे
सड़के खाली होगी पर साइकिल चला नहीं पाएंगे
रास्ते खुले होंगे पर कहीं जा नहीं पाएंगे
और जो पास है उनसे हाथ मिल नहीं पाएंगे
जो घर जाने की राह देखते थे वो घर मे ही बंद हो जाएंगे
जिनके साथ वक़्त बिताने को तरसते थे उनसे भी ऊब जाएंगे
इस बीमारी के कारण घर पर भी जा नहीं पाएंगे
Tourist Places खाली होंगे पर घूमने जा नहीं पाएंगे
क्या है तारीख .... कौन - सा है वार ये भी भूल जाएंगे
कैलंडर हो जाएंगे बैमानी बस यूँ ही दिन रात बिताएंगे
साफ हो जाएगी हवा पर चैन की सांस ले नहीं पाएंगे
- Garima Kawnar
# क्या आपने सोचा था ...?
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