andhakar #अंधकार
एक , दो , तीन , चार ,
पाँच , छः , सात और आठ ,
बीत गई classes इन बातों
ही बात
10 वी में जाने के लिए
होना था नवीं में पास
इसीलिए 2017 में ना ले पाए
चैन की सांस
2018 में बोर्ड के
इग्ज़ैम दिए
अब चुनना था एक रास्ता
, क्योँ की 11 वीं खड़ी थी तीन तीन पैगाम लिए
कभी सोच लेलें साइंस
कभी ले कॉमर्स
फिर दिल ने कहा बेटा
आगे करना है diploma और course
तभी रास्ता हमने अपना
मोड़ लिया
साइंस और कॉमर्स का
सपना हमने छोड़ दिया
दिमाग में बैठ गई थी
बात
लेंगे तो हम सिर्फ आर्ट
11th भी हो
जाएगी
12th भी हो
जाएगी
अब स्कूल छोड़ना पड़ेगा
दोस्तों से जुदाई का गम
सहेना पड़ेगा
न जाने फिर कौन कहाँ होगा
हमे याद करने का फिर
उनके पास समय कहाँ होगा
पड़ जाएंगे सभी अकेले
नौकरी ढूंढते ढूंढते हो जाएंगे थकेले
शादी भी हो जाएगी
न जाने ये दोस्ती कहाँ खो जाएगी
दोस्तों , मुझे तो तुम्हारी याद बहुत आएगी
न जाने ये जिंदगी अभी और कितनी बार डगमगाएगी ।
- poem for you vary friends
by garima kanwar

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